खफा भी करते है,वफा भी करते है, अपने प्यार को वो आंखो से बयां भी करते है, ना जाने कैसी नाराजगी है उनकी हमसे, हमें खोना भी चाहते है और पाने की दुआ भी करते है।
ठोकरे खाता हूँ पर "शान"से चलता हूँ मै खुले आसमान के नीचे सीना तान के चलता हूँ , मुश्किले तो "साज"है, जिंदगी के। उठूँगा ,गिरूंगा फिर उठूँगा और आखिर मे "जीतूंगा मै ही" ये ठान के चलता हूँ.
Comments
Post a Comment