संदेह से देखना तेरी आदत है, पर मेरी यारी भी देख खामियां मुझ में लाख सही, पर मेरी वफादारी भी देख यूँ न कर मुझे अलग खुद से, मेरी लाचारी भी देख,ले झुका तेरे कदमों में , तेरे आगे सब हारा भी देख..!!
ठोकरे खाता हूँ पर "शान"से चलता हूँ मै खुले आसमान के नीचे सीना तान के चलता हूँ , मुश्किले तो "साज"है, जिंदगी के। उठूँगा ,गिरूंगा फिर उठूँगा और आखिर मे "जीतूंगा मै ही" ये ठान के चलता हूँ.
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